लोकोक्तियाँ | lokoktiyan

लोकोक्तियाँ | Lokoktiyan की इस महत्वपूर्ण पोस्ट में आपके लिए परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण लोकोक्तियों का समावेश किया गया है|

लोकोक्तियाँ Lokoktiyan

लोकोक्ति का सामान्य अर्थ क्या है?

लोकोक्ति शब्द दो शब्दों के मेल से बना है — लोक + उक्ति। लोक में चिरकाल से प्रचलित कथन लोकोक्ति कहलाता है। लोकोक्ति का संबंध किसी घटित घटना से होता है। लोकोक्तियों एवं मुहावरों के प्रयोग से भाषा प्रभावोत्पादक बनती है।

लोकोक्ति का अन्य नाम क्या है?

लोकोक्ति को ‘ कहावत’ नाम से भी जाना जाता है।

लोकोक्ति और मुहावरों में अंतर

  • मुहावरा वाक्यांश होता है जबकि लोकोक्ति अपनेआप में पूर्ण होती है।
  • मुहावरे में लिंग, वचन और काल आदि के अनुसार कुछ परिवर्तन आ जाता है जबकि लोकोक्ति मे वाक्य में प्रयुक्त होने पर भी किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं आता है।
  • मुहावरे के अंत में साधारणतया क्रिया सूचक शब्द जैसे-करना, होना आदि प्रयुक्त होते हैं जबकि लोकोक्ति में ऐसा नहीं होता है।
  • मुहावरे भाषा की लाक्षणिकता को दर्शाते हैं जबकि लोकोक्तियाँ समाज के भाषायी इतिहास को अभिव्यक्त करती हैं।

लोकोक्तियों का महत्व क्या है

लोकोक्तियों या कहावतों का प्रयोग करके वाक्य को अधिक प्रामाणिक, युक्तिसंगत, तार्किक और जोशीला बनाया जा सकता है। कहावतों के कारण कथन में विशेष प्रभाव आ जाता है। कथन को स्पष्ट करने की दृष्टि से भी लोकोक्तियाँ बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

Lokoktiyan

  1. . अंधा क्या चाहे दो आँखें :- बिना प्रयास इच्छित फल की प्राप्ति।
  2. . अंधेर नगरी चौपट राजा :- अयोग्य प्रशासन
  3. अंधा बाँटे रेवड़ी फिर-फिर अपने को देय :- अधिकार मिलने पर स्वार्थी व्यक्ति अपने लोगों की ही मदद करता है।
  4. अंधे के हाथ बटेर लगना :- बिना परिश्रम के अयोग्य व्यक्ति को सुफल की प्राप्ति
  5. अंधों में काना राजा :- मूर्खो के बीच अल्पज्ञ भी बुद्धिमान माना जाता है।
  6. अधजल गगरी छलकत जाय :- अल्पज्ञ अपने ज्ञान पर अधिक इतराता है।
  7. अपनी करनी पार उतरनी :- मनुष्य को स्वयं के कर्मों के अनुसार ही फल मिलता है।
  8. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता :- अकेला आदमी बड़ा काम नहीं कर सकता
  9. अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत :- हानि हो जाने के बाद पछताना व्यर्थ है।
  10. अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई :- परिश्रम कोई करे फल किसी अन्य को मिले
  11. अंधे के आगे रोना, अपना दीदा खोना :- सहानुभूतिहीन या मूर्ख व्यक्ति के सामने अपना दुखड़ा रोना व्यर्थ है।
  12. अक्ल बड़ी या भैंस :- शारीरिक बल की अपेक्षा बुद्धिबल श्रेष्ठ होता है।
  13. अटका बनिया देव उधार :- मजबूर व्यक्ति अनचाहा कार्य भी करता है।
  14. अपना रख पराया चख :- स्वयं के पास होने पर भी किसी अन्य की वस्तु का उपभोग करना।
  15. अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग :- तालमेल न होना।
  16. अरहर की टट्टी गुजराती ताला :- बेमेल प्रबंध, सामान्य चीजोंकी सुरक्षा में अत्यधिक खर्च करना।
  17. अपना हाथ जगन्नाथ :- अपना कार्य स्वयं करना ही उपयुक्त रहता है।
  18. आँख का अंधा, गाँठ का पूरा :- बुद्धिहीन किन्तु सम्पन्न।
  19. आँख बची और माल यारों का :- ध्यान हटते ही चोरी हो सकती है।
  20. आधी छोड़ पूरे ध्यावे, आधी मिले न पूरे पावै :- अधिक के लोभ में उपलब्ध वस्तु या लाभ को भी खो बैठना।
  21. आम के आम गुठलियों के दाम :- दुगुना लाभ।
  22. आए थे हरिभजन को, ओटन लगे कपास :- बड़े उद्देश्य को लेकर कार्य प्रारम्भ करना किन्तु छोटे कार्य में लग जाना।
  23. आगे कुआँ पीछे खाई :- सब ओर कष्ट ही कष्ट होना।
  24. आ बैल मुझे मार :- जान-बूझकर विपत्ति मोल लेना।
  25. आगे नाथ न पीछे पगहा :- पूर्णतः बंधन रहित/ बेसहारा।
  26. आठ वार नौ त्योहार :- मौजमस्ती से जीवन बिताना।
  27. आप भले तो जग भला :- स्वयं भले होने पर आपको भले लोग ही मिलते हैं।
  28. आसमान से गिरा, खजूर में अटका :- काम पूरा होते-होते व्यवधान आ जाना।
  29. आठ कनौजिये नौ चूल्हे :- अलगाव या फूट होना।
  30. इन तिलों में तेल नहीं :- कुछ मिलने या मदद की उम्मीद न होना।
  31. इधर कुआँ उधर खाई :- सब ओर संकट।
  32. उँगली पकड़ते पहुँचा पकड़ना :- थोड़ी सी मदद पाकर अधिकार जमाने की कोशिश करना।
  33. उतर गई लोई तो क्या करेगा कोई :- एक बार इज्जत जाने पर व्यक्ति निर्लज हो जाता है।
  34. उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे :- दोषी व्यक्ति द्वारा निर्दोष पर दोषारोपण करना।
  35. उल्टे बाँस बरेली को :- विपरीत कार्य करना।
  36. ऊँट के मुँह में जीरा :- आवश्यकता अधिक आपूर्ति कम।
  37. ऊँची दुकान फीका पकवान :- मात्र दिखावा।
  38. ऊँट किस करवट बैठता है :- परिणाम किसके पक्ष में होता है/ अनिश्चित परिणाम।
  39. ऊधो का लेना न माधो का देना :- किसी से कोई लेना-देना न होना।
  40. उधार का खाना फूस का तापना :- बिना परिश्रम दूसरों के सहारे जीने का निरर्थक प्रयास करना।
  41. ऊधो की पगड़ी, माधो का सिर :- किसी एक का दोष दूसरे पर मढ़ना।
  42. एक अनार सौ बीमार :- वस्तु अल्प चाह अधिक लोगों की।
  43. एक तो करेला दूसरा नीम चढ़ा :- एकाधिक दोष होना
  44. एक गंदी मछली सारे तालाब को गंदा करती है :- एक व्यक्ति की बुराई से पूरे परिवार समूह की बदनामी होना।
  45. एक तो चोरी दूसरे सीना-जोरी :- अपराध करके रौब जमाना।
  46. एक म्याँन में दो तलवारें नहीं समा सकती :- दो समान अधिकार वाले व्यक्ति एक साथ कार्य नहीं कर सकते।
  47. एकै साधे सब सधै, सब साधे जब जाय :- एक समय में एक ही कार्य करना फलदायी
  48. एक ही थैली के चट्टे-बट्टे होना :- समान दुर्गुण वाले एकाधिक व्यक्ति।
  49. एक पंथ दो काज :- एक कार्य से दोहरा लाभ।
  50. एक हाथ से ताली नहीं बजती :- केवल एक पक्षीय सक्रियता से काम नहीं होता।

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